Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर सफेद वस्त्रों में सजेंगे ठाकुरजी, जानें कब है और क्या होगा खास
Madhulika Singh October 22, 20265:02 pm48 views
शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस अवसर पर जगदीश मंदिर में भगवान को 501 खीर का भोग अर्पित किया जाएगा। जानें पूर्णिमा तिथि, चांदनी में खीर रखने की परंपरा और मां लक्ष्मी की पूजा का धार्मिक महत्व।
GVI NETWORK. शरद पूर्णिमा का पर्व रविवार, 25 अक्टूबर को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले इस पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसे कौमुदी व्रत, कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी शीतल चांदनी को अमृत के समान गुणकारी माना जाता है।
शरद पूर्णिमा के अवसर पर उदयपुर के कृष्ण मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। ठाकुरजी का सफेद वस्त्रों में आकर्षक शृंगार किया जाएगा और उन्हें धवल चांदनी के बीच विराजित किया जाएगा। शहर के प्रसिद्ध जगदीश मंदिर में भी 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा महोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर भगवान को 501 दूध की खीर का भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित होगा।
शरद पूर्णिमा 2026: कब शुरू होगी पूर्णिमा तिथि?
पं. जितेंद्र त्रिवेदी के अनुसार, आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगी। 25 अक्टूबर की रात पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहने के कारण इसी दिन शरद पूर्णिमा का व्रत और चंद्रमा का पूजन किया जाएगा।
शरद पूर्णिमा पर चांदनी में क्यों रखी जाती है खीर?
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की विशेष परंपरा है। इस दिन चावल और दूध से खीर तैयार कर उसे चांदनी में रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। इसी विश्वास के चलते श्रद्धालु खीर को सुरक्षित ढंग से ढककर चांदनी में रखते हैं और बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व
शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की आराधना के लिए भी विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। इसी कारण इस पर्व को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और कर्ज से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। श्रद्धालु रात में जागरण कर देवी लक्ष्मी की स्तुति करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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Madhulika Singh
Madhulika Singh has been actively involved in journalism for nearly 21 years. She began her journalistic career with Udaipur-based evening daily Aprahan Times. Soon after, she was selected by Dainik Bhaskar and served with its Jodhpur edition for three years.
She then joined Rajasthan Patrika in Udaipur, where she worked for nearly 17 years. Her long association with the organisation came to an end in 2025.
Madhulika is now working as an independent journalist. She also contributes to Lakecity Update and Rajasthan Today, continuing her work in journalism with a focus on meaningful, credible and people-centric stories.
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