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Saturday, October 3, 2026
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लेकसिटी से ड्रीमसिटी मुंबई तक.. ‘इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5’ में चमक रहे प्रणय जोशी

लेकसिटी से ड्रीमसिटी मुंबई तक.. ‘इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5’ में चमक रहे प्रणय जोशी

-10 साल की उम्र में देखा सपना, अब राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान, पिता के संघर्ष से मिली सीख जीवीआई नेटवर्क। सपने वही सच होते हैं, जिन्हें मुश्किलों के बावजूद छोड़ने से इनकार कर दिया जाए। उदयपुर के युवा

-10 साल की उम्र में देखा सपना, अब राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान, पिता के संघर्ष से मिली सीख

जीवीआई नेटवर्क। सपने वही सच होते हैं, जिन्हें मुश्किलों के बावजूद छोड़ने से इनकार कर दिया जाए। उदयपुर के युवा डांसर प्रणय जोशी ने भी यही कर दिखाया है। शहर की गलियों से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचे प्रणय सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाले ‘इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5’ में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ शो में हिस्सा लेना नहीं, बल्कि ट्रॉफी जीतकर उदयपुर और राजस्थान का नाम रोशन करना है।
इस सीजन में अभिनेत्री करिश्मा कपूर, कोरियोग्राफर गीता कपूर, टेरेंस लुईस और अभिनेता जावेद जाफरी निर्णायक की भूमिका में दिखाई देंगे। मुंबई में अपने सपनों की उड़ान भर रहे प्रणय ने लेकसिटी अपडेट से विशेष बातचीत में अपने संघर्ष और सफलता के सफर को साझा किया।

10 साल की उम्र में शुरू हुआ डांस का सफर, सपनों के लिए पढ़ाई भी छोड़ी

प्रणय ने महज 10 वर्ष की उम्र में डांस सीखना शुरू किया। शुरुआत स्थानीय मंचों से हुई, लेकिन मंजिल राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की थी। इस दौरान उन्होंने कई डांस ऑडिशन दिए, जहां बार-बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी। प्रणय बताते हैं, “हर रिजेक्शन ने मुझे और ज्यादा मेहनत करना सिखाया। मैंने कभी प्रैक्टिस नहीं छोड़ी।”
अपने डांस करियर को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने बीकॉम फर्स्ट ईयर तक पढ़ाई की, लेकिन लगातार ऑडिशन, ट्रेनिंग और परफॉर्मेंस के कारण पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। उनका मानना है कि हर संघर्ष ने उन्हें पहले से ज्यादा मजबूत बनाया।

पिता के संघर्ष से मिली आगे बढ़ने की प्रेरणा

प्रणय की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके पिता राजेश जोशी हैं, जो पेशे से गायक और कलाकार हैं। कभी परिवार का अपना व्यवसाय था, लेकिन परिस्थितियां बदलने के बाद उन्हें व्यवसाय छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने संगीत को ही अपना जीवन बना लिया।
राजेश जोशी नवरात्रि आयोजनों और फतहसागर किनारे अपनी गायकी से लोगों का मनोरंजन करते थे। उनके लिए तालियां और लोगों का स्नेह ही सबसे बड़ा पुरस्कार है।
प्रणय कहते हैं, “मैंने पापा को कभी हार मानते नहीं देखा। उन्हीं से मैंने सीखा कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी हों, सपनों का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।”

मां और चाचा बने सबसे मजबूत सहारा

प्रणय की मां निशा जोशी, जो एक शिक्षिका हैं, ने हर कदम पर बेटे का मनोबल बढ़ाया। वहीं उनके चाचा रामेश्वर जोशी, जो पेशे से अधिवक्ता हैं, संघर्ष के हर दौर में उनके साथ मजबूती से खड़े रहे। परिवार का भरोसा और समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

पहले भी राष्ट्रीय मंच तक पहुंचे, लेकिन हार नहीं मानी

यह प्रणय का पहला बड़ा मंच नहीं है। इससे पहले वे ‘सुपर डांसर’ के टॉप-30 तक पहुंच चुके हैं। हालांकि उस समय उनका सफर आगे नहीं बढ़ पाया, लेकिन उन्होंने उसे असफलता नहीं बल्कि सीख माना। प्रणय को हिपहॉप डांस सबसे ज्यादा पसंद है। सोशल मीडिया पर उनके डांस वीडियो को भी हजारों लोग पसंद करते हैं। वे अपने भाई के साथ कई मंचों पर शानदार प्रस्तुतियां दे चुके हैं।

भाई धनंजय भी बना रहे हैं फिल्मी दुनिया में पहचान

प्रणय के भाई धनंजय जोशी भी डांसर और अभिनेता हैं। वे जल्द ही मशहूर कोरियोग्राफर और निर्देशक रेमो डिसूजा के साथ एक फिल्म में नजर आने वाले हैं। इससे साफ है कि जोशी परिवार में कला और अभिनय का जुनून पीढ़ियों से जीवित है।

अब उदयपुर को है बड़ी उम्मीद

अब पूरा उदयपुर प्रणय जोशी के प्रदर्शन का इंतजार कर रहा है। शहर को उम्मीद है कि संघर्ष, मेहनत और परिवार के विश्वास के दम पर यह युवा डांसर ‘इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5’ में शानदार प्रदर्शन करते हुए नई पहचान बनाएगा।प्रणय की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बार-बार असफल होने के बावजूद अपने सपनों को जिंदा रखते हैं। क्योंकि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जो हर गिरने के बाद फिर उठने का साहस रखते हैं।

Madhulika Singh
Written by

Madhulika Singh

Madhulika Singh has been actively involved in journalism for nearly 21 years. She began her journalistic career with Udaipur-based evening daily Aprahan Times. Soon after, she was selected by Dainik Bhaskar and served with its Jodhpur edition for three years. She then joined Rajasthan Patrika in Udaipur, where she worked for nearly 17 years. Her long association with the organisation came to an end in 2025. Madhulika is now working as an independent journalist. She also contributes to Lakecity Update and Rajasthan Today, continuing her work in journalism with a focus on meaningful, credible and people-centric stories.

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