Rajasthan RAS 2024 Success Story: दृष्टिबाधित शिक्षक से RAS अधिकारी, हौसले की रोशनी ने बदली भावेश की तकदीर
जीवीआई नेटवर्क। कभी-कभी जिंदगी रोशनी छीन लेती है…लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो उसी अंधेरे में अपनी दिशा खुद गढ़ लेते हैं। उदयपुर के भावेश देसाई—एक दृष्टिबाधित शिक्षक—ने यही कर दिखाया। RAS 2024 में उन
जीवीआई नेटवर्क। कभी-कभी जिंदगी रोशनी छीन लेती है…लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो उसी अंधेरे में अपनी दिशा खुद गढ़ लेते हैं। उदयपुर के भावेश देसाई—एक दृष्टिबाधित शिक्षक—ने यही कर दिखाया। RAS 2024 में उनका चयन सिर्फ एक परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि उस सोच को चुनौती देना है जो सीमाओं को स्थायी मान लेती है।
भावेश ने जनरल वर्ग (अनुसूचित क्षेत्र) में 97वीं रैंक, TSP दृष्टि दिव्यांग श्रेणी में दूसरी रैंक हासिल की। यह उस विश्वास का प्रमाण है कि काबिलियत आँखों से नहीं, इरादों से देखती है।
भजन संध्या से शुरू हुआ सफर
शुरुआत में भावेश भजन संध्या करते थे—वहीं से आर्थिक सहारा मिला। फिर सरकारी नौकरी मिली… वे थर्ड ग्रेड शिक्षक बने… लेकिन सपना वहीं नहीं रुका। दिनचर्या सधी हुई, लक्ष्य स्पष्ट, और भीतर एक शांत जिद—“मुझे यहीं नहीं रुकना है।” एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया—
अगर आप अमेरिका के राष्ट्रपति होते, तो इजरायल युद्ध का क्या समाधान करते? भावेश का जवाब सादा था, लेकिन गहरा— “सभी पक्षों से बातचीत कर, नेगोशिएशन के जरिए रास्ता निकालेंगे।”
यह जवाब सिर्फ कूटनीति नहीं था— यह उनके व्यक्तित्व का आईना था। संयम, संवाद और समाधान—यही उनका तरीका है।
परिवार का साथ… और भीतर की आग
डूंगरपुर के हथाई गांव से निकलकर उदयपुर तक का सफर अकेले तय नहीं हुआ। परिवार ने साथ दिया, विश्वास दिया, और सबसे जरूरी—हार मानने नहीं दी।
Credits : Dainik Bhaskar