जिसे तस्वीरों में देखा था, सामने देखकर रह गए दंग; 880 बुजुर्गों ने किए जगन्नाथपुरी के दर्शन
जगन्नाथपुरी में 880 वरिष्ठ तीर्थयात्रियों की बरसों पुरानी आस पूरी हुई। भगवान जगन्नाथ के दर्शन करते ही कई बुजुर्ग भावुक हो गए। यात्रियों ने ध्वज परिवर्तन के साथ पुरी बीच, कोणार्क सूर्य मंदिर और लिंगराज मंदिर के भी दर्शन किए।

भगवान जगन्नाथ के दर्शन होते ही भावुक हुए बुजुर्ग
जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश करते ही तीर्थयात्रियों के चेहरों पर खुशी और उत्साह नजर आया। लंबे समय से भगवान जगन्नाथ के दर्शन की इच्छा रखने वाले कई बुजुर्ग दर्शन के दौरान भावुक हो गए। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर भगवान से आशीर्वाद मांगा और ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारों के बीच भक्ति में डूबे नजर आए। दर्शन के बाद यात्रियों ने पुरी में खरीदारी की। इसके अलावा पुरी बीच, लोकनाथ मंदिर, चंदन तालाब और बेड़ी वाले हनुमानजी मंदिर के भी दर्शन किए। पुरी बीच पर यात्रियों ने समुद्र की लहरों का आनंद लिया और यात्रा के यादगार पलों को कैमरे में कैद किया।

चंद्रभागा बीच पर बिताया समय, कोणार्क सूर्य मंदिर पहुंचे
रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन सुबह सभी यात्री बसों के माध्यम से यात्रा के अगले पड़ाव के लिए रवाना हुए। सबसे पहले यात्रियों को चंद्रभागा बीच ले जाया गया। समुद्र तट पर पहुंचते ही बुजुर्गों में फिर उत्साह नजर आया। यात्रियों ने समुद्र किनारे समय बिताया और फोटो खिंचवाकर यादगार पलों को संजोया। इसके बाद तीर्थयात्रियों का काफिला प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर पहुंचा। करीब 700 वर्ष पुरानी इस ऐतिहासिक धरोहर की भव्य स्थापत्य कला और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी ने यात्रियों को आकर्षित किया। रथ के आकार में निर्मित मंदिर की वास्तुकला देखकर कई वरिष्ठ तीर्थयात्री अभिभूत नजर आए। कई यात्रियों के लिए यह अनुभव खास रहा, क्योंकि जिस ऐतिहासिक विरासत को उन्होंने अब तक तस्वीरों में देखा था, उसे पहली बार सामने से देखने का अवसर मिला। तीर्थ यात्रा के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने से यात्रियों की खुशी दोगुनी हो गई।

लिंगराज मंदिर में भगवान शिव के दर्शन
कोणार्क के बाद तीर्थयात्रियों का काफिला भुवनेश्वर स्थित लिंगराज मंदिर पहुंचा। यहां यात्रियों ने भगवान शिव के दर्शन किए। मंदिर की भव्य संरचना, कलिंग शैली की वास्तुकला और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी ने सभी को आकर्षित किया। लिंगराज मंदिर अपनी धार्मिक मान्यता और ऐतिहासिक स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है। यहां हरिहर स्वरूप की भी मान्यता है। मंदिर की विशाल संरचना और कलात्मक शिल्प देखकर वरिष्ठ तीर्थयात्री मंत्रमुग्ध नजर आए।

‘जय जगन्नाथ’ के जयकारों के साथ उदयपुर के लिए रवाना हुए यात्री
लिंगराज मंदिर में दर्शन के बाद सभी 880 वरिष्ठ तीर्थयात्री मालतीपाटपुर रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए। यहां से विशेष ट्रेन के माध्यम से सभी यात्री उदयपुर वापसी के लिए रवाना हुए। वापसी के दौरान भी ट्रेन में तीर्थयात्रियों का उत्साह बना रहा। ट्रेन में ‘जय जगन्नाथ’ और ‘जय श्री जगन्नाथ’ के जयकारे गूंजते रहे। आस्था, इतिहास और संस्कृति से जुड़ी यह यात्रा वरिष्ठ नागरिकों के लिए यादगार बन गई।

तीर्थयात्रियों को दी गई यात्रा किट
यात्रा के दौरान सभी तीर्थयात्रियों को यात्रा किट उपलब्ध कराई गई। इसमें बेडशीट, कंबल, छाता, टूथब्रश, टूथपेस्ट, तेल, शैंपू पाउच, आईना और कैप सहित जरूरत का सामान शामिल था। इससे लंबी यात्रा के दौरान वरिष्ठ यात्रियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहीं।

3 अक्टूबर को उदयपुर से रवाना हुई थी विशेष ट्रेन
मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना-2026 के तहत जगन्नाथपुरी-कोणार्क यात्रा के लिए विशेष ट्रेन 3 अक्टूबर को उदयपुर के राणा प्रताप नगर रेलवे स्टेशन से रवाना हुई थी। इसमें उदयपुर संभाग के 780 वरिष्ठ तीर्थयात्री सवार हुए थे। इसके बाद कोटा से 100 यात्री ट्रेन में शामिल हुए। इस तरह कुल 880 वरिष्ठ तीर्थयात्री विशेष ट्रेन से जगन्नाथपुरी-कोणार्क यात्रा पर रवाना हुए। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक स्थलों के दर्शन के साथ ओडिशा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी करीब से देखा।